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Desh Bhakti की कविताएँ



लोहे के मर्द by रामधारी सिंह दिनकर

पुरुष वीर बलवान,
देश की शान,
हमारे नौजवान
घायल होकर आये हैं।

कहते हैं, ये पुष्प, दीप,
अक्षत क्यों लाये हो?

हमें कामना नहीं सुयश-विस्तार की,
फूलों के हारों की, जय-जयकार की।

तड़प रही घायल स्वदेश की शान है।
सीमा पर संकट में हिन्दुस्तान है।

ले जाओ आरती, पुष्प, पल्लव हरे,
ले जाओ ये थाल मोदकों ले भरे।

तिलक चढ़ा मत और हृदय में हूक दो,
दे सकते हो तो गोली-बन्दूक दो।

मैं न चुप हूँ न गाता हूँ by अटल बिहारी वाजपेयी

सवेरा है मगर पूरब दिशा में
घिर रहे बादल
रूई से धुंधलके में
मील के पत्थर पड़े घायल
ठिठके पाँव
ओझल गाँव
जड़ता है न गतिमयता

स्वयं को दूसरों की दृष्टि से
मैं देख पाता हूं
न मैं चुप हूँ न गाता हूँ

समय की सदर साँसों ने
चिनारों को झुलस डाला,
मगर हिमपात को देती
चुनौती एक दुर्ममाला,

बिखरे नीड़,
विहँसे चीड़,
आँसू हैं न मुस्कानें,
हिमानी झील के तट पर
अकेला गुनगुनाता हूँ।
न मैं चुप हूँ न गाता ह

*क्या ये तुम्हे पता है?* by प्रेरक अरोरा

देश हुआ स्वतंत्र मिला इसे गणतंत्र, क्या तुम्हे पता है

हुआ देश का विकास, बढ़े यहाँ रोज़गार, क्या तुम्हे पता है

बढ़ा यहाँ व्यापार, बढ़ा देश में सभ्याचार, क्या तुम्हे पता है

बढ़े यहां कारखाने, लगे वो कूड़ा नदियों में बहाने, क्या तुम्हे पता है

बढ़ी कमाई सबकी तो हुई बड़ी गाड़ियां कितनी, क्या तुम्हे पता है

बढ़ा है कितना धुँआँ जिस से बढ़ी  वायुमंडल में गर्मी, क्या ये तुम्हे पता है


समय हुआ स्वच्छन्द, पड़ी सबकी मानसिकता मंद, क्या ये तुम्हे पता है

बढ़ी कमाई जैसे सबमें बढ़ी ईर्ष्या वैसे क्यों ये तुम्हे पता है?

बढ़ाओ संतुष्टि मन में ताकि बढ़े शान्ति मन में बस ये मुझे पता है।

करो सभी से प्यार, बने सभी के उच्च विचार, बनेगा तभी महान समाज, यही बस मुझे पता है,
क्या ये तुम्हे पता है?

बह रही है विकास की धारा by अमित गाला

बह रही है विकास की धारा,
बदल रहा हैदेश हमारा,
वि कासवाद का लके र नारा,
नि कल पड़ा हैदेश हमारा,
अरेहम सब आगेआएं गे
गांधी गांधी गाएं ग,े
सपना था जो बापूका,
परूा कर केहम दि खायेंग,े
जात पात सेऊपर उठ,
नवभारत हम बनाएं ग,े
भदे भाव को करकेदूर,
नवभारत हम बनाएं ग,े
बह रही हैवि कास की धारा,
बदल रहा हैदेश हमारा,
वि कासवाद का लके र नारा,
बड़ रहा हैदेश हमारा,
अरेहम सब आगेआएं ग,े
नहेरू नहेरू गाएं ग,े
सपना था जो पं डि त का,
परूा कर हम दि खाएं ग,े
भदे भाव को करकेदूर,
नवभारत हम बनाएं ग,े
जात पात सेऊपर उठ ,
नवभारत हम बनाएं ग,े
बह रही हैवि कास की धारा,
बदल रहा हैदेश हमारा,
शि क्षि त होगा देश हमारा
तो वि कसि त होगा देश हमारा
अरेहम सब आगेआएं ग,े
नवभारत को बनाएं ग,े
सपना था जो शास्त्री का,
परूा कर हम दि खाएं ग,े
जात पात सेऊपर उठ,
नवभारत हम बनाएं ग,े
भदे भाव को करकेदूर,
नवभारत हम बनाएं ग,े
बह रही हैवि कास की धारा,
बदल रहा हैदेश हमारा,
वि कासवाद का लके र नारा,
बड़ रहा हैदेश हमारा,
अरेहम सब आगेआएं ग,े
मोदी मोदी गाएं ग,े
सपना हैजो मोदी का,
परूा कर हम दि खाएं ग,े
बह रही हैप्रमे की धारा,
बदल रहा हैदेश हमारा,
शि क्षि त होगा देश हमारा
तो वि कसि त होगा देश हमारा
अरेहम सब आगेआएं ग,े
नवभारत को बनाएं ग,े
गांधी जी केकदमों प,े
हम चलकेदि खाएं ग,े
नफरतों को मि टाएं ग,े
नवभारत को बनाएं ग,े
जात पात सेऊपर उठ,
नवभारत हम बनाएं ग,े
नई सभु ा हैनया सवरेा,
नव ऊर्जा का देश हैमरेा
मोदीजी केनते त्वृ में,
नि कल पड़ा हैदेश हमारा,
अरेहम सब आगेआएं ग,े
मोदी मोदी गाएं ग,े
सपना हैजो मोदी का ,
परूा कर हम दि खाएं ग,े
वि कासवाद का हैअब नारा,
मोदीजी का देश हमारा,
गांधीजी का देश हमारा,
नई सभु ा हैनया सवरेा,
गांधीजी केआदर्शो प,े
हम चल करकेदि खाएं ग,े
सपना था जो बापूका,
परूा कर हम दि खाएं ग,े
बह रही हैस्नहे की धारा,
समद्ृ ध होगा देश हमारा,
नई सभु ा हैनया सवरेा,
नव ऊर्जा का देश हैमरेा,
सं कल्प हैजो मोदी जी का,
परूा कर हम दि खाएं ग,े
नवभारत हम बनाएं ग,े
भदे भाव सेऊपर उठ,
नवभारत हम बनाएं गे
सपना था जो बापूका परूा कर हम दि खाएं ग,े
नवभारत हम बनाएं ग,े
गांधी गांधी गाएं ग,े
नवभारत हम बनाएं गे

am i living in India or China ? by अमित गाला

many a times i wonder,
if i am living in India or am i living in China?
everyday i see China and everything is chinese ,
chinese phones, chinese tv, chinese fridge, chinese machine,
as off no indian or other country brands exist anymore?
Not just products but even festivals have become chinese,
Holi is played with Chinese colours, Diwali is Celebrated with Chinese Crackers,
in Kite Festival the Patang Flies in the Sky but its Strings and even at times the Kite itself is
chinese
we hear about accidents and people and birds even die because of this so called chinese Majna
or Strings,
I always believed Holi is Indian Festival,
but when i see Chinese Colours in Indian hands,
i am amused how people happily wana colour me with china
Same goes with Diwali, People burn cheap chinese crackers
as though indians have decided no matter what we celebrate we will let china celebrate,
the Indian Premier League as popularly called but is it really Indian, except the player and the
viewers,
it should be called Vivo Chinese Premier League ,
it's unfortunate we easily forget the past,
China has killed our soldiers,
China has eaten up our land,
But what's the effect of this on us?
People just share "Rest In Peace Tribute Messages in their status"
but hang on that phone with which its sent is generally a chinese one,
What indian is left in india?
Can anyone really tell?
i remember the Britishers ruled us with East India company,
and now China is Ruling us with its products,
as for every product that people buy of china,
they are helping them aiding them,
so they can attack us more?
they can ravage us more?
How can one aid it's enemy nation?
Where are the senses Lost?
generally people say "well because government is allowing it we are buying it
but just because government has failed in it's duties,
doesn't mean we should fail too,
as 2 wrongs never make 1 right,
At times i feel we Miss the Famous Trio of Lal , Bal , Pal,
of Indian National Congress the way they did embargo,
that's the way that should be followed,
anyways such Leaders are born in centuries,
and maybe that kind of public too,
because that time even though British Products were enforced upon us,
people still denied,
now nobody is forcing us to buy chinese but people are still buying chinese of their own will,
By sending a message on Republic Day and Independence Day, again which is generally sent
through chinese phones,
our duty won't be over, we as citizen of india must be proactive ,
we should ourselves stop and inspire others to boycott it,
I have never used chinese products and never will,
even if its for free, i don't need it,
i will rather not use a product then use a china,
as i know what kind of country it is,
i don't want to aid them even by a bit,
so in return they can damage our country and rest of the world,
as they are doing with corona ,
Please let India be India,
Lets get it free from china,
its difficult but not impossible,
we can do it if we really want ,
and we can always find excuses if we don't want,
anyways let the people decide what they want,
but i will keep on wondering and get experience of living in china till then,
and the question will always come to my mind,
if this is India or is it China,
if this is India or has it become China itself?????
answer it for your own & you will realise


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